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जेएनयू में रविवार शाम बड़ी हिंसा हुई – ये नकाबपोश कौन थे ?

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कुमार पंकज :: ६,जनवरी :: जेएनयू केम्पस ::

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार शाम बड़ी हिंसा हुई। लाठी-डंडे, हॉकी स्टिक से लैस नकाबपोश हमलावरों ने यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स और टीचरों को बेरहमी से पीटा। इसमें 25 से ज्यादा छात्र-टीचर घायल हो गए। मामले में फिलहाल दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। एफआईआर दर्ज करने की बात कही जा रही है। लेकिन लोगों के मन में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है। दिल्ली पुलिस की जांच में इनसे पर्दा उठता है या नहीं देखना होगा।

यूनिवर्सिटी में खुलेआम घूमते और तोड़फोड़ करते नकाबपोशों की तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। ये लोग दिन की रोशनी में डंडे लेकर घूमते दिखे। लेकिन ये नकाबपोश कौन थे और कहां से आए थे इसका जवाब दिल्ली पुलिस और जेएनयू प्रशासन को जल्द से जल्द सामने लाना होगा।

जेएनयू के गेटों पर कड़ी सुरक्षा रहती है, कोई भी बाहरी शख्स कैंपस में आसानी से दाखिल नहीं हो सकता है। स्टूडेंट्स को भी आई कार्ड देखने के बाद ही एंट्री मिलती है। अगर ये लोग बाहरी थे तो इतनी बड़ी तादाद में लाठी-डंडों और रॉडों के साथ कैसे और कहां से यूनिवर्सिटी में घुस आए। इसका जवाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को देना ही होगा।

इतनी देर तक कैंपस के अंदर हंगामा और स्टूडेंट्स के साथ मारपीट होती रही, इस दौरान यूनिवर्सिटी प्रशासन क्या कर रहा था। खासतौर से कैंपस में बड़ी तादाद में सिक्यॉरिटी गार्ड्स तैनात रहते हैं, वे सब इस दौरान क्या कर रहे थे। उन्होंने हमलावरों को रोकने या पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की।

पुलिस के मुताबिक जेएनयू से शाम 4 बजे से ही पीसीआर कॉल्स आनी शुरू हो गई थीं। पुलिस को 90 से ज्यादा पीसीआर कॉल्स की गईं। स्टूडेंट्स का आरोप है कि अगर यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस पहले ऐक्शन में आ जाती घटना को कंट्रोल किया जा सकता था।

जेएनयू में हुई हिंसा में छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष समेत 25 से ज्यादा छात्र और टीचर गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें एम्स और सफदरजंग में भर्ती कराया गया। करीब 200 हमलावरों ने साबरमती हॉस्टल समेत कई बिल्डिंग में जमकर तोड़फोड़ की। रजिस्ट्रार की सलाह पर स्टूडेंट्स ने कई बार 100 नंबर डायल किया। पीसीआर को 90 से ज्यादा कॉल मिलीं

मगर एबीवीपी की कहना है की रजिस्ट्रेशन से बौखलाए नकाबपोश वामपंथी छात्रों ने मचाया उत्पात। एबीवीपी की नैशनल जनरल सेक्रटरी निधि त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि लेफ्ट के छात्रों ने जेएनयू में अघोषित आपातकाल लागू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘वामपंथी छात्रों ने जेएनयू में शिक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। पहले स्टूडेंट्स को क्लास नहीं लेने दिया गया।

उसके बाद स्टूडेंट्स को पेपर नहीं देने दिया गया। उसके बाद स्टूडेंट्स को रजिस्ट्रेशन करने से रोक रहे थे और आज जब स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करने के लिए सामने आए, बोला कि हम रजिस्ट्रेशन करेंगे, इस बात से गुस्से में आकर वामपंथी छात्रों ने हॉस्टलों में घुस-घुसकर उन छात्रों को मारा है जिन्होंने रजिस्ट्रेशन की मांग की थी। बहुत बुरी तरह से मारा है। लाठी, डंडा, रॉड जो कुछ भी उनके हाथ में था, उससे हमला किया है। बहुत से छात्र घायल हुए हैं। अस्पताल में भर्ती हैं। ये वही लोग हैं जो नहीं चाहते कि जेएनयू कभी सामान्य परिस्थिति में आ पाए और शिक्षण प्रक्रिया सामान्य हो।…नकाब पहनकर ये वामपंथी छात्र हॉस्टलों में घुस-घुसकर छात्रों को पीटा है। पत्थर भी फेंके हैं।’

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